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Parvez Shaikh
zindagi chal mira qusoor bataa
zindagi chal mira qusoor bataa | ज़िंदगी चल मिरा क़ुसूर बता
- Parvez Shaikh
ज़िंदगी
चल
मिरा
क़ुसूर
बता
हिज्र
क्यूँ
काटना
पड़ा
मुझ
को
- Parvez Shaikh
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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सुब्ह
तक
हिज्र
में
क्या
जानिए
क्या
होता
है
शाम
ही
से
मिरे
क़ाबू
में
नहीं
दिल
मेरा
Jigar Moradabadi
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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हम
कहाँ
और
तुम
कहाँ
जानाँ
हैं
कई
हिज्र
दरमियाँ
जानाँ
Jaun Elia
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अब
तो
मैं
बाल
बढ़ा
सकता
हूँ
हिज्र
में
कितनी
सहूलत
है
मुझे
Nasir khan 'Nasir'
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उस
सेे
तो
मैं
बिछड़
गया
अब
देख
ऐ
'पवन'
कब
दुनिया
आए
रास
यही
सोचता
रहा
Pawan Kumar
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'मुनीर'
अच्छा
नहीं
लगता
ये
तेरा
किसी
के
हिज्र
में
बीमार
होना
Muneer Niyazi
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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यार
तुम
दिल
दुखा
रही
हो
क्या
बोल
दो
दूर
जा
रही
हो
क्या
यूँँ
ख़मोशी
मुझे
दिखा
कर
तुम
ज़ुल्म
पर
ज़ुल्म
ढह
रही
हो
क्या
मेरी
ग़ुर्बत
को
जान
कर
जानाँ
जान
मुझ
से
छुड़ा
रही
हो
क्या
दिल
में
ख़्वाहिश
है
दोस्ती
की
मगर
दुश्मनी
तुम
निभा
रही
हो
क्या
रिज़्क़
अल्लाह
दे
रहा
है
हमें
बात
उस
की
भुला
रही
हो
क्या
क्या
है
'परवेज़'
की
ख़ता
ये
बता
बे-सबब
आज़मा
रही
हो
क्या
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Parvez Shaikh
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ये
सच
है
कि
हमने
मुहब्बत
नहीं
की
कभी
दिल
ने
इतनी
भी
ज़हमत
नहीं
की
मिला
ज़ख़्म
अपनो
से
हम
को
हमेशा
किसी
से
कभी
भी
अदावत
नहीं
की
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Parvez Shaikh
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कुछ
भी
अच्छा
नहीं
हुआ
मिरे
साथ
जब
से
तू
ने
किया
गिला
मिरे
साथ
सोचता
था
कि
वो
मिरा
हैं
फ़क़त
जिस
ने
अच्छा
नहीं
किया
मिरे
साथ
उस
को
मालूम
था
ग़रीब
हूँ
मैं
इश्क़
का
ढोंग
क्यूँ
रचा
मिरे
साथ
तुम
पर
अब
प्यार
आ
रहा
है
मुझे
कुछ
तो
कर
दीजिए
बुरा
मिरे
साथ
सब
ने
परवेज़
से
नज़र
फेरी
वो
अकेला
था
जो
हँसा
मिरे
साथ
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Parvez Shaikh
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ज़ुल्म
ऐसा
न
मेरे
साथ
करें
ज़िस्म
में
रूह
भी
न
बाक़ी
रहे
Parvez Shaikh
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यहीं
डूब
जाने
को
जी
चाहता
है
यूँँ
आँसू
बहाने
को
जी
चाहता
है
नहीं
है
जहाँ
में
हमारा
कोई
अब
हमें
मुस्कुराने
को
जी
चाहता
है
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