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Nasir khan 'Nasir'
ab to main baal badha saka hoon
ab to main baal badha saka hoon | अब तो मैं बाल बढ़ा सकता हूँ
- Nasir khan 'Nasir'
अब
तो
मैं
बाल
बढ़ा
सकता
हूँ
हिज्र
में
कितनी
सहूलत
है
मुझे
- Nasir khan 'Nasir'
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अब
यही
सोचते
रहते
हैं
बिछड़
कर
तुझ
से
शायद
ऐसे
नहीं
होता
अगर
ऐसा
करते
Asim Wasti
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
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बहन
का
प्यार
जुदाई
से
कम
नहीं
होता
अगर
वो
दूर
भी
जाए
तो
ग़म
नहीं
होता
Unknown
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियांँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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बदलना
वक़्त
ने
सीखा
है
तुम
सेे
घड़ी
से
पहले
की
ईजाद
हो
तुम
Nasir khan 'Nasir'
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उसकी
यादों
कि
तंगदस्ती
में
अब
ग़ज़ल
रोज़गार
है
अपना
Nasir khan 'Nasir'
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और
कुछ
देर
ठहर
दिन
का
निकलना
तय
है
वक़्त
बदलेगा
मेरी
जान,
बदलना
तय
है
Nasir khan 'Nasir'
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एक
तस्वीर
बनाऊँगा
तेरी
और
फिर
हाथ
लगाऊंगा
तुझे
Nasir khan 'Nasir'
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तितलियाँ
यूँँ
ही
नहीं
बैठ
रही
हैं
तुम
पर
बारहा
तुमको
भी
फूलों
में
गिना
जाता
है
Nasir khan 'Nasir'
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