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Parvez Shaikh
ye mirii zindagi kisi kii hai
ye mirii zindagi kisi kii hai | ये मिरी ज़िंदगी किसी की है
- Parvez Shaikh
ये
मिरी
ज़िंदगी
किसी
की
है
फ़िक्र
मत
कीजे
आप
ही
की
है
जो
ख़फ़ा
है
उसे
मनाना
है
इस
लिए
हम
ने
शा'इरी
की
है
जिन
को
माना
था
दिल-अज़ीज़
कभी
उन्हीं
अपनों
ने
दुश्मनी
की
है
ठोकरें
लाख
खाईं
हम
ने
मगर
सिर्फ़
इक
रब
की
बंदगी
की
है
उस
हसीना
के
बिन
जिऍं
कैसे
टूट
कर
जिस
से
दिल-लगी
की
है
इश्क़
कर
के
पता
चला
हम
को
हम
ने
जीते
जी
ख़ुद-कुशी
की
है
तुम
को
परवेज़
क्या
हुआ
है
आज
इक
हसीना
से
दोस्ती
की
है
- Parvez Shaikh
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एक
लड़की
को
इतना
चाहने
से
ही
क्यूँ
मुक़द्दर
में
मेरी
हार
हो
गई
Parvez Shaikh
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यहीं
डूब
जाने
को
जी
चाहता
है
यूँँ
आँसू
बहाने
को
जी
चाहता
है
नहीं
है
जहाँ
में
हमारा
कोई
अब
हमें
मुस्कुराने
को
जी
चाहता
है
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Parvez Shaikh
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ये
मत
सोचना
अब
मुहब्बत
नहीं
है
उसे
बस
बताने
की
हिम्मत
नहीं
है
वफ़ा
माँगता
क्यूँ
फिरुँ
हर
किसी
से
मिरे
दिल
में
इतनी
भी
ग़ुर्बत
नहीं
है
तिरे
मन
में
जब
आए
तब
काम
करना
मुझे
अब
किसी
की
ज़रूरत
नहीं
है
मिरे
यार
कहते
हैं
'परवेज़'
मुझ
को
मुझे
माल-ओ-ज़र
की
ज़रूरत
नहीं
है
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Parvez Shaikh
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वो
ज़ालिम
ज़रा
कुछ
तो
खौफ़-ए-ख़ुदा
कर
कि
आ
सकती
हैं
अब
क़यामत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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तकब्बुर
तू
दौलत
पे
इतना
भी
मत
कर
चिपक
सकती
है
तुझ
से
ग़ुर्बत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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