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Parvez Shaikh
ek ladki ko itnaa chaahne se hi
ek ladki ko itnaa chaahne se hi | एक लड़की को इतना चाहने से ही
- Parvez Shaikh
एक
लड़की
को
इतना
चाहने
से
ही
क्यूँ
मुक़द्दर
में
मेरी
हार
हो
गई
- Parvez Shaikh
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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पलटा
दे
तक़दीर
हमारी
आकर
माथा
चूम
हमारा
Siddharth Saaz
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इस
बेवफ़ाई
पर
मुझे
हैरत
नहीं
तुझको
पा
लूँ
ऐसी
मिरी
क़िस्मत
नहीं
Harsh saxena
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मिलना
था
इत्तिफ़ाक़
बिछड़ना
नसीब
था
वो
उतनी
दूर
हो
गया
जितना
क़रीब
था
Anjum Rehbar
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मेरी
तक़दीर
में
जलना
है
तो
जल
जाऊँगा
तेरा
वा'दा
तो
नहीं
हूँ
जो
बदल
जाऊँगा
Sahir Ludhianvi
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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मुहब्बत
है
क्यूँ
पासदारी
नहीं
है
जी
में
उसके
ईमानदारी
नहीं
है
Parvez Shaikh
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ख़ुशी
पर
हमारा
भी
हक़
था
मगर
यूँँ
ग़मों
ने
नहीं
दी
इजाज़त
कभी
भी
Parvez Shaikh
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तेरी
तस्वीर
को
सीने
से
लगा
रक्खा
है
मैंने
इक
राज़
को
ही
दिल
में
बसा
रक्खा
है
आ
ही
जाता
है
तू
हर
बार
मिरे
ख़्वाबों
में
तेरी
ही
याद
ने
दीवाना
बना
रक्खा
हैं
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Parvez Shaikh
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मिली
ना
किसी
से
मुहब्बत
कभी
भी
पड़ी
ना
किसी
की
ज़रूरत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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देखना
है
मेरी
वफ़ा
का
रंग
देख
ले
हाथ
पर
हिना
का
रंग
ये
तकब्बुर
ये
नाज़
नख़रों
से
तेरे
चेहरे
पे
हैं
अना
का
रंग
साँवला
चेहरा
नील-गूँ
आँखें
और
उस
पर
तेरी
अदा
का
रंग
नाज़
करती
हैं
जिस
पे
हूर-ओ-मलक
तुझ
पे
उतरा
है
वो
हया
का
रंग
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Parvez Shaikh
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