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Parvez Shaikh
baat ik tarafaa achchhii hoti nahin
baat ik tarafaa achchhii hoti nahin | बात इक तरफ़ा अच्छी होती नहीं
- Parvez Shaikh
बात
इक
तरफ़ा
अच्छी
होती
नहीं
हाल
हम
सेे
भी
पूछिए
तो
कभी
- Parvez Shaikh
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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बात
ये
है
कि
आदमी
शाइर
या
तो
होता
है
या
नहीं
होता
Mahboob Khizan
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प्यार
मुहब्बत
बाद
की
बातें
जान
कभी
ये
सोचा
है
किसने
तेरा
साथ
दिया
था
कौन
नशे
में
ख़त्म
हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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ख़ुशी
पर
हमारा
भी
हक़
था
मगर
यूँँ
ग़मों
ने
नहीं
दी
इजाज़त
कभी
भी
Parvez Shaikh
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तेरी
तस्वीर
को
सीने
से
लगा
रक्खा
है
मैंने
इक
राज़
को
ही
दिल
में
बसा
रक्खा
है
आ
ही
जाता
है
तू
हर
बार
मिरे
ख़्वाबों
में
तेरी
ही
याद
ने
दीवाना
बना
रक्खा
हैं
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Parvez Shaikh
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यहीं
डूब
जाने
को
जी
चाहता
है
यूँँ
आँसू
बहाने
को
जी
चाहता
है
नहीं
है
जहाँ
में
हमारा
कोई
अब
हमें
मुस्कुराने
को
जी
चाहता
है
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Parvez Shaikh
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हाथ
आया
न
कुछ
मिरे
अब
तो
शा'इरी
से
गुज़ारा
कैसे
करूँँ
Parvez Shaikh
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क्या
कहूँ
कुछ
कहा
भी
नहीं
जाता
है
बिन
तिरे
अब
रहा
भी
नहीं
जाता
है
ज़ख़्म
ऐसा
के
मरहम
कोई
भी
नहीं
मुझ
से
ये
सब
सहा
भी
नहीं
जाता
है
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Parvez Shaikh
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