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Parvez Shaikh
hijr-e-mausam men apni si kar li
hijr-e-mausam men apni si kar li | हिज्र-ए-मौसम में अपनी सी कर ली
- Parvez Shaikh
हिज्र-ए-मौसम
में
अपनी
सी
कर
ली
तू
ने
हद
पार
सारी
ही
कर
ली
दिल
मिरा
टूट
ज़ोर
से
ही
गया
बात
जब
उसने
ग़ैर
की
कर
ली
- Parvez Shaikh
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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सब्र
कर
सब्र
की
घड़ी
है
अभी
इतनी
मुश्किल
से
जो
मिली
है
अभी
वक़्त
से
पहले
मौत
अच्छी
नहीं
ज़िंदगी
सामने
पड़ी
है
अभी
आँख
रंजूर
हो
गई
मेरी
उस
ने
जाने
की
ज़िद
गढ़ी
है
अभी
बाद
तेरे
कोई
नहीं
होगा
तू
मिरी
आख़िरी
ख़ुशी
है
अभी
तू
भी
'परवेज़'
को
समझ
न
सका
तंज़
तेरा
भी
लाज़मी
है
अभी
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Parvez Shaikh
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तकब्बुर
तू
दौलत
पे
इतना
भी
मत
कर
चिपक
सकती
है
तुझ
से
ग़ुर्बत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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ये
मत
सोचना
अब
मुहब्बत
नहीं
है
उसे
बस
बताने
की
हिम्मत
नहीं
है
वफ़ा
माँगता
क्यूँ
फिरुँ
हर
किसी
से
मिरे
दिल
में
इतनी
भी
ग़ुर्बत
नहीं
है
तिरे
मन
में
जब
आए
तब
काम
करना
मुझे
अब
किसी
की
ज़रूरत
नहीं
है
मिरे
यार
कहते
हैं
'परवेज़'
मुझ
को
मुझे
माल-ओ-ज़र
की
ज़रूरत
नहीं
है
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Parvez Shaikh
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ज़िंदगी
चल
मिरा
क़ुसूर
बता
हिज्र
क्यूँ
काटना
पड़ा
मुझ
को
Parvez Shaikh
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ये
सच
है
कि
हमने
मुहब्बत
नहीं
की
कभी
दिल
ने
इतनी
भी
ज़हमत
नहीं
की
मिला
ज़ख़्म
अपनो
से
हम
को
हमेशा
किसी
से
कभी
भी
अदावत
नहीं
की
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Parvez Shaikh
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