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Piyush Shrivastava
akela rah gaya hai phool titli ud gaii jab se
akela rah gaya hai phool titli ud gaii jab se | अकेला रह गया है फूल तितली उड़ गई जब से
- Piyush Shrivastava
अकेला
रह
गया
है
फूल
तितली
उड़
गई
जब
से
सुना
है
बाग़
उजड़ा
था
कभी
तूफ़ान
आने
पर
- Piyush Shrivastava
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हँसते
हँसते
निकल
पड़े
आँसू
रोते
रोते
कभी
हँसी
आई
Anwar Taban
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मैं
अँधेरों
से
बचा
लाया
था
अपने
आप
को
मेरा
दुख
ये
है
मिरे
पीछे
उजाले
पड़
गए
Rahat Indori
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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मुझे
रोना
नहीं
आवाज़
भी
भारी
नहीं
करनी
मोहब्बत
की
कहानी
में
अदाकारी
नहीं
करनी
Afzal Khan
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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मैं
चाहता
था
मुझ
सेे
बिछड़
कर
वो
ख़ुश
रहे
लेकिन
वो
ख़ुश
हुआ
तो
बड़ा
दुख
हुआ
मुझे
Umair Najmi
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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नहीं
भरते
हैं
गहरे
ज़ख़्म
भी
मरहम
लगाने
पर
बहुत
तकलीफ़
होती
है
बिछड़
अपनों
से
जाने
पर
Piyush Shrivastava
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पहले
सन्नाटा
रहा
फिर
आँधी
आई
लुट
गया
सब
मेरा
फिर
बरबादी
आई
मेरे
ख़्वाबों
का
मकाँ
भी
हिल
गया
तब
जब
फ़रेबी
की
हवा
तूफ़ानी
आई
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Piyush Shrivastava
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तवज्जोह
दी
न
जीते
जी
बुज़ुर्गों
को
कभी
जिसने
चढ़ाने
चल
दिया
वो
हार
उनकी
मौत
आने
पर
छिले
हैं
पाँव
माँ
के
राह
में
चलते
हुए
फिर
भी
लगी
है
भूख
वो
हर
रोज़
बच्चों
की
मिटाने
पर
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Piyush Shrivastava
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शाम
जो
उनको
साथ
बैठाया
आसमाँ
ने
भी
नूर
बरसाया
साज़िशे
सारे
तारों
ने
की
जब
अपनी
ज़ुल्फ़ों
को
उसने
लहराया
चाँद
भी
जलने
सा
लगा
फिर
जब
उसने
खुलके
ज़रा
सा
मुस्काया
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Piyush Shrivastava
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ख़ुदाया
क्या
नई
सी
कोई
अब
उड़ान
बाक़ी
है
गिराने
के
लिए
नया
सा
आसमान
बाक़ी
है
ज़रा
बता
इलाज
मेरी
मुश्किलों
का
मुझको
भी
या
अब
हयात
में
नई
सी
खींचतान
बाक़ी
है
कि
खोजूँ
मंज़िलें
कहाँ
कहाँ
बता
दे
मुझको
भी
या
मेरा
क्या
नया
सा
कोई
इम्तिहान
बाक़ी
है
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Piyush Shrivastava
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