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Piyush Shrivastava
khudaaya kya nayi si koi ab udaan baaki hai
khudaaya kya nayi si koi ab udaan baaki hai | ख़ुदाया क्या नई सी कोई अब उड़ान बाक़ी है
- Piyush Shrivastava
ख़ुदाया
क्या
नई
सी
कोई
अब
उड़ान
बाक़ी
है
गिराने
के
लिए
नया
सा
आसमान
बाक़ी
है
ज़रा
बता
इलाज
मेरी
मुश्किलों
का
मुझको
भी
या
अब
हयात
में
नई
सी
खींचतान
बाक़ी
है
कि
खोजूँ
मंज़िलें
कहाँ
कहाँ
बता
दे
मुझको
भी
या
मेरा
क्या
नया
सा
कोई
इम्तिहान
बाक़ी
है
- Piyush Shrivastava
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ये
कैसे
सानिहे
अब
पेश
आने
लग
गए
हैं
तेरे
आग़ोश
में
हम
छटपटाने
लग
गए
हैं
बहुत
मुमकिन
है
कोई
तीर
हमको
आ
लगेगा
हम
ऐसे
लोग
जो
पंछी
उड़ाने
लग
गए
हैं
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Vikram Sharma
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शाख़-दर-शाख़
होती
है
ज़ख़्मी
जब
परिंदा
शिकार
होता
है
Indira Varma
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परिंदा
चला
आशियाना
बदल
कहाँ
एक
अपना
ठिकाना
हुआ
Chandan Sharma
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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वो
क़ुर्बां
कर
चुके
थे
पंख
इक
दूजे
की
ख़ातिर
हवा
में
इसलिए
दोनों
बराबर
उड़
रहे
थे
Atul K Rai
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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निकाल
लाया
हूँ
एक
पिंजरे
से
इक
परिंदा
अब
इस
परिंदे
के
दिल
से
पिंजरा
निकालना
है
Umair Najmi
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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तुम
मुहब्बत
से
नहीं
मुझ
सेे
ख़फ़ा
हो
शायद
तुम
अगर
चाहो
तो
पिंजरा
भी
बदल
सकते
हो
मुंतज़िर
हूँ
मैं
सो
नंबर
भी
नहीं
बदलूँगा
और
तुम
शहर
का
नक़्शा
भी
बदल
सकते
हो
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Vikram Sharma
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बातें
दिल
में
यूँँ
कुछ
मेरे
चुभती
रहीं
जैसे
लगती
है
इक
कील
दीवार
में
Piyush Shrivastava
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अकेला
रह
गया
है
फूल
तितली
उड़
गई
जब
से
सुना
है
बाग़
उजड़ा
था
कभी
तूफ़ान
आने
पर
Piyush Shrivastava
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ज़बाँ
मीठी
तो
आँखों
में
समुंदर
लेके
फिरते
हैं
यहाँ
के
लोग
शैतानी
का
मंतर
लेके
फिरते
हैं
फ़रेबी
सी
ये
दुनिया
हो
रही
है
ग़ैर
तो
छोड़ो
यहाँ
तो
अपने
ही
हाथों
में
ख़ंजर
लेके
फिरते
हैं
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Piyush Shrivastava
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ज़िंदगी
में
अपनी
हम
कुछ
फेर
लिख
दें
हार
में
रुस्वाई
का
कुछ
ढ़ेर
लिख
दें
तुम
हमारी
कुछ
बुराई
लिखते
जाओ
हाल
पर
हम
अपने
कोई
शे'र
लिख
दें
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Piyush Shrivastava
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पहले
सन्नाटा
रहा
फिर
आँधी
आई
लुट
गया
सब
मेरा
फिर
बरबादी
आई
मेरे
ख़्वाबों
का
मकाँ
भी
हिल
गया
तब
जब
फ़रेबी
की
हवा
तूफ़ानी
आई
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Piyush Shrivastava
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