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Piyush Shrivastava
zindagi men apni ham kuchh fer likh den
zindagi men apni ham kuchh fer likh den | ज़िंदगी में अपनी हम कुछ फेर लिख दें
- Piyush Shrivastava
ज़िंदगी
में
अपनी
हम
कुछ
फेर
लिख
दें
हार
में
रुस्वाई
का
कुछ
ढ़ेर
लिख
दें
तुम
हमारी
कुछ
बुराई
लिखते
जाओ
हाल
पर
हम
अपने
कोई
शे'र
लिख
दें
- Piyush Shrivastava
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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ज़िंदगी
ज़िंदा-दिली
का
है
नाम
मुर्दा-दिल
ख़ाक
जिया
करते
हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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हाल
मत
पूछो
हमारी
ज़िंदगी
का
एक
चलती-फिरती
सी
दीवार
है
बस
Rachit Sonkar
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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क्यूँ
डरें
ज़िन्दगी
में
क्या
होगा
कुछ
न
होगा
तो
तजरबा
होगा
Javed Akhtar
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पहले
सन्नाटा
रहा
फिर
आँधी
आई
लुट
गया
सब
मेरा
फिर
बरबादी
आई
मेरे
ख़्वाबों
का
मकाँ
भी
हिल
गया
तब
जब
फ़रेबी
की
हवा
तूफ़ानी
आई
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Piyush Shrivastava
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शाम
जो
उनको
साथ
बैठाया
आसमाँ
ने
भी
नूर
बरसाया
साज़िशे
सारे
तारों
ने
की
जब
अपनी
ज़ुल्फ़ों
को
उसने
लहराया
चाँद
भी
जलने
सा
लगा
फिर
जब
उसने
खुलके
ज़रा
सा
मुस्काया
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Piyush Shrivastava
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ज़बाँ
मीठी
तो
आँखों
में
समुंदर
लेके
फिरते
हैं
यहाँ
के
लोग
शैतानी
का
मंतर
लेके
फिरते
हैं
फ़रेबी
सी
ये
दुनिया
हो
रही
है
ग़ैर
तो
छोड़ो
यहाँ
तो
अपने
ही
हाथों
में
ख़ंजर
लेके
फिरते
हैं
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Piyush Shrivastava
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जैसे
गहरी
सी
नदिया
की
मझधार
में
ऐसे
उलझा
पड़ा
हूँ
मैं
संसार
में
जो
भी
चाहे
वो
उतनी
ही
चाभी
भरे
जैसे
कोई
खिलौना
हूँ
बाज़ार
में
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Piyush Shrivastava
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इक
तन्हा
ज़िंदगी
है
बस
क़हर
बन
रही
है
जो
ज़ख़्मों
की
दवा
थी
अब
ज़हर
बन
रही
है
सोचा
ख़याल
था
इक
थे
दर्द
कुछ
दिखाने
जो
शा'इरी
लिखी
है
तो
बहर
बन
रही
है
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Piyush Shrivastava
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