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Piyush Shrivastava
shaam jo unko saath baithaaya
shaam jo unko saath baithaaya | शाम जो उनको साथ बैठाया
- Piyush Shrivastava
शाम
जो
उनको
साथ
बैठाया
आसमाँ
ने
भी
नूर
बरसाया
साज़िशे
सारे
तारों
ने
की
जब
अपनी
ज़ुल्फ़ों
को
उसने
लहराया
चाँद
भी
जलने
सा
लगा
फिर
जब
उसने
खुलके
ज़रा
सा
मुस्काया
- Piyush Shrivastava
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वो
न
आएगा
हमें
मालूम
था
इस
शाम
भी
इंतिज़ार
उस
का
मगर
कुछ
सोचकर
करते
रहे
Parveen Shakir
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हम
बहुत
दूर
निकल
आए
हैं
चलते
चलते
अब
ठहर
जाएँ
कहीं
शाम
के
ढलते
ढलते
Iqbal Azeem
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देख
कर
इंसान
की
बेचारगी
शाम
से
पहले
परिंदे
सो
गए
Iffat Zarrin
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शाम
ढलने
से
फ़क़त
शाम
नहीं
ढलती
है
उम्र
ढल
जाती
है
जल्दी
पलट
आना
मेरे
दोस्त
Ashfaq Nasir
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बुलाया
शाम
को
लेकिन
वहाँ
मैं
सुब्ह
जा
बैठा
सुना
था
देर
से
आना
उसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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एक
कश्ती
क्यूँ
अभी
लौटी
नहीं
क्यूँ
किनारे
शाम
से
ख़ामोश
हैं
Umesh Maurya
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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ख़ुश
रहते
हैं
हँस
सकते
हैं
भोले
भाले
होते
हैं
वो
जो
शे'र
नहीं
कहते
हैं
क़िस्मत
वाले
होते
हैं
पीना
अच्छी
बात
नहीं
है
आते
हैं
समझाने
दोस्त
और
ढलते
ही
शाम
उन्हें
फिर
हमीं
सँभाले
होते
हैं
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Vineet Aashna
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हम
सेे
भी
इक
लड़की
मिलने
आती
थी
हम
भी
शाम
को
कैफ़े
जाया
करते
थे
Tanoj Dadhich
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आजकल
सुकून
भी
हुज़ूर
छीन
लेते
हैं
झूठे
कुछ
रिवाज़
भी
सुरूर
छीन
लेते
हैं
लोग
क्या
कहेंगे
अब
ज़माने
भर
के
हम
सेे
ये
बोलकर
हमारा
ही
उबूर
छीन
लेते
हैं
झूठी
महफ़िलें
है
सब
यहाँ
की,
चंद
बातों
में
लोग
हम
सेे
चेहरे
का
भी
नूर
छीन
लेते
हैं
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Piyush Shrivastava
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तवज्जोह
दी
न
जीते
जी
बुज़ुर्गों
को
कभी
जिसने
चढ़ाने
चल
दिया
वो
हार
उनकी
मौत
आने
पर
छिले
हैं
पाँव
माँ
के
राह
में
चलते
हुए
फिर
भी
लगी
है
भूख
वो
हर
रोज़
बच्चों
की
मिटाने
पर
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Piyush Shrivastava
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पहले
सन्नाटा
रहा
फिर
आँधी
आई
लुट
गया
सब
मेरा
फिर
बरबादी
आई
मेरे
ख़्वाबों
का
मकाँ
भी
हिल
गया
तब
जब
फ़रेबी
की
हवा
तूफ़ानी
आई
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Piyush Shrivastava
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नहीं
भरते
हैं
गहरे
ज़ख़्म
भी
मरहम
लगाने
पर
बहुत
तकलीफ़
होती
है
बिछड़
अपनों
से
जाने
पर
Piyush Shrivastava
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कुछ
ग़ैरों
ने
लूटा
हमें
लूटा
हमें
कुछ
अपनों
ने
नींदें
रहीं
बस
रातों
की
वो
लूट
ली
कुछ
सपनों
ने
Piyush Shrivastava
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