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Piyush Shrivastava
tavajjoh dii na jeete jee buzurgon ko kabhi jisne
tavajjoh dii na jeete jee buzurgon ko kabhi jisne | तवज्जोह दी न जीते जी बुज़ुर्गों को कभी जिसने
- Piyush Shrivastava
तवज्जोह
दी
न
जीते
जी
बुज़ुर्गों
को
कभी
जिसने
चढ़ाने
चल
दिया
वो
हार
उनकी
मौत
आने
पर
छिले
हैं
पाँव
माँ
के
राह
में
चलते
हुए
फिर
भी
लगी
है
भूख
वो
हर
रोज़
बच्चों
की
मिटाने
पर
- Piyush Shrivastava
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रब
के
बनाए
ख़ून
के
रिश्ते
हैं
और
ये
उन
रिश्तों
में
हमेशा
से
तकरार
करती
है
दौलत
की
लत
लगी
है
ज़माने
के
लोगों
को
लत
है
कि
अच्छे
खासों
को
बीमार
करती
है
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Piyush Shrivastava
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पहले
सन्नाटा
रहा
फिर
आँधी
आई
लुट
गया
सब
मेरा
फिर
बरबादी
आई
मेरे
ख़्वाबों
का
मकाँ
भी
हिल
गया
तब
जब
फ़रेबी
की
हवा
तूफ़ानी
आई
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Piyush Shrivastava
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छोड़
कर
के
हमको
यूँँ
तन्हा
वो
भी
पछताई
होगी
सोच
कर
रुस्वाई
उसकी
आँख
भी
भर
आई
होगी
काँपी
तो
होगी
हथेली
उसकी
भी,
तब
जाके
मेहँदी
ग़ैर
की
ख़ातिर
ही
उसने
हाथों
में
रचवाई
होगी
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Piyush Shrivastava
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इक
तन्हा
ज़िंदगी
है
बस
क़हर
बन
रही
है
जो
ज़ख़्मों
की
दवा
थी
अब
ज़हर
बन
रही
है
सोचा
ख़याल
था
इक
थे
दर्द
कुछ
दिखाने
जो
शा'इरी
लिखी
है
तो
बहर
बन
रही
है
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Piyush Shrivastava
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जैसे
गहरी
सी
नदिया
की
मझधार
में
ऐसे
उलझा
पड़ा
हूँ
मैं
संसार
में
जो
भी
चाहे
वो
उतनी
ही
चाभी
भरे
जैसे
कोई
खिलौना
हूँ
बाज़ार
में
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Piyush Shrivastava
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