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Piyush Shrivastava
rab ke banaaye KHoon ke rishte hain aur ye
rab ke banaaye KHoon ke rishte hain aur ye | रब के बनाए ख़ून के रिश्ते हैं और ये
- Piyush Shrivastava
रब
के
बनाए
ख़ून
के
रिश्ते
हैं
और
ये
उन
रिश्तों
में
हमेशा
से
तकरार
करती
है
दौलत
की
लत
लगी
है
ज़माने
के
लोगों
को
लत
है
कि
अच्छे
खासों
को
बीमार
करती
है
- Piyush Shrivastava
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एक
उसको
ही
पता
थी
मेरी
आदत
वो
नहीं
हँसता
था
मेरे
कहकहे
पर
Siddharth Saaz
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वक़्त
रहता
नहीं
कहीं
टिक
कर
आदत
इस
की
भी
आदमी
सी
है
Gulzar
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मुझे
मायूस
भी
करती
नहीं
है
यही
आदत
तिरी
अच्छी
नहीं
है
Javed Akhtar
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अपनी
इस
आदत
पे
ही
इक
रोज़
मारे
जाएँगे
कोई
दर
खोले
न
खोले
हम
पुकारे
जाएँगे
Waseem Barelvi
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ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
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हिम्मत
से
सच
कहो
तो
बुरा
मानते
हैं
लोग
रो-रो
के
बात
कहने
की
आदत
नहीं
रही
Dushyant Kumar
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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एक
मुझे
ख़्वाब
देखने
के
सिवा
चाय
पीने
की
गंदी
आदत
है
Balmohan Pandey
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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तवज्जोह
दी
न
जीते
जी
बुज़ुर्गों
को
कभी
जिसने
चढ़ाने
चल
दिया
वो
हार
उनकी
मौत
आने
पर
छिले
हैं
पाँव
माँ
के
राह
में
चलते
हुए
फिर
भी
लगी
है
भूख
वो
हर
रोज़
बच्चों
की
मिटाने
पर
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Piyush Shrivastava
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ख़ुदाया
क्या
नई
सी
कोई
अब
उड़ान
बाक़ी
है
गिराने
के
लिए
नया
सा
आसमान
बाक़ी
है
ज़रा
बता
इलाज
मेरी
मुश्किलों
का
मुझको
भी
या
अब
हयात
में
नई
सी
खींचतान
बाक़ी
है
कि
खोजूँ
मंज़िलें
कहाँ
कहाँ
बता
दे
मुझको
भी
या
मेरा
क्या
नया
सा
कोई
इम्तिहान
बाक़ी
है
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Piyush Shrivastava
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ये
ज़िन्दगी
में
अब
भला
क्या
हो
गया
ख़ुदस
मिले
मुझको
तो
अर्सा
हो
गया
Piyush Shrivastava
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छोड़
कर
के
हमको
यूँँ
तन्हा
वो
भी
पछताई
होगी
सोच
कर
रुस्वाई
उसकी
आँख
भी
भर
आई
होगी
काँपी
तो
होगी
हथेली
उसकी
भी,
तब
जाके
मेहँदी
ग़ैर
की
ख़ातिर
ही
उसने
हाथों
में
रचवाई
होगी
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Piyush Shrivastava
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अकेला
रह
गया
है
फूल
तितली
उड़
गई
जब
से
सुना
है
बाग़
उजड़ा
था
कभी
तूफ़ान
आने
पर
Piyush Shrivastava
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