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Piyush Shrivastava
zabaan meethi to aankhoñ men samandar leke firte hain
zabaan meethi to aankhoñ men samandar leke firte hain | ज़बाँ मीठी तो आँखों में समुंदर लेके फिरते हैं
- Piyush Shrivastava
ज़बाँ
मीठी
तो
आँखों
में
समुंदर
लेके
फिरते
हैं
यहाँ
के
लोग
शैतानी
का
मंतर
लेके
फिरते
हैं
फ़रेबी
सी
ये
दुनिया
हो
रही
है
ग़ैर
तो
छोड़ो
यहाँ
तो
अपने
ही
हाथों
में
ख़ंजर
लेके
फिरते
हैं
- Piyush Shrivastava
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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बड़े
बूढों
के
घर
को
अब
जो
बच्चे
छोड़
देते
हैं
समुंदर
साहिलों
तक
आ
के
रस्ता
मोड़
देते
हैं
वसीयत
में
कोई
भी
दस्तख़त
जाली
नहीं
होता
ये
पूरे
होश
में
अपने
ही
घर
को
तोड़
देते
हैं
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anupam shah
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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चलो
न
फिर
से
दरिया
के
नज़दीक
चलें
चलो
न
फिर
से
डुबकी
साथ
लगाएँगे
Atul K Rai
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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कोई
कहता
था
समुंदर
हूँ
मैं
और
मिरी
जेब
में
क़तरा
भी
नहीं
Kaifi Azmi
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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पहले
सन्नाटा
रहा
फिर
आँधी
आई
लुट
गया
सब
मेरा
फिर
बरबादी
आई
मेरे
ख़्वाबों
का
मकाँ
भी
हिल
गया
तब
जब
फ़रेबी
की
हवा
तूफ़ानी
आई
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Piyush Shrivastava
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तवज्जोह
दी
न
जीते
जी
बुज़ुर्गों
को
कभी
जिसने
चढ़ाने
चल
दिया
वो
हार
उनकी
मौत
आने
पर
छिले
हैं
पाँव
माँ
के
राह
में
चलते
हुए
फिर
भी
लगी
है
भूख
वो
हर
रोज़
बच्चों
की
मिटाने
पर
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Piyush Shrivastava
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कुछ
ग़ैरों
ने
लूटा
हमें
लूटा
हमें
कुछ
अपनों
ने
नींदें
रहीं
बस
रातों
की
वो
लूट
ली
कुछ
सपनों
ने
Piyush Shrivastava
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रब
के
बनाए
ख़ून
के
रिश्ते
हैं
और
ये
उन
रिश्तों
में
हमेशा
से
तकरार
करती
है
दौलत
की
लत
लगी
है
ज़माने
के
लोगों
को
लत
है
कि
अच्छे
खासों
को
बीमार
करती
है
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Piyush Shrivastava
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ज़िंदगी
में
अपनी
हम
कुछ
फेर
लिख
दें
हार
में
रुस्वाई
का
कुछ
ढ़ेर
लिख
दें
तुम
हमारी
कुछ
बुराई
लिखते
जाओ
हाल
पर
हम
अपने
कोई
शे'र
लिख
दें
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Piyush Shrivastava
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