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Bhaskar Shukla
laazim hai ab ki aap ziyaada udaas hon
laazim hai ab ki aap ziyaada udaas hon | लाज़िम है अब कि आप ज़ियादा उदास हों
- Bhaskar Shukla
लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
- Bhaskar Shukla
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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मैं
चीख़ता
रहा
कुछ
और
भी
है
मेरा
इलाज
मगर
ये
लोग
तुम्हारा
ही
नाम
लेते
रहे
Anjum Saleemi
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
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मुस्कुराहट
ओढ़कर
यूँँ
ही
नहीं
रहता
हूँ
मैं
झाँककर
देखो
कभी
अंदर
बहुत
टूटा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
भर
का
तो
वा'दा
ज़िन्दगी
से
कर
लिया
हाँ
मगर
ऐ
मौत
!
उसके
बाद
बस
तेरा
हूँ
मैं
काश
!
झूठा
ही
सही,
वो
पूछता
कैसे
हो
तुम
मैं
भुला
देता
हर
इक
ग़म,
बोलता,
अच्छा
हूँ
मैं
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Bhaskar Shukla
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दिन
गुज़रते
हैं
अब
किताबों
में
और
रातें
तुम्हारे
ख़्वाबों
में
जानता
हूँ
उसे
मैं
आहट
से
छुप
नहीं
पायेगा
हिजाबों
में
यार
जैसी
है
रंगत-ओ-ख़ुशबू
नाज़ुकी
कम
है
इन
गुलाबों
में
हम
भी
छानेंगे
ख़ाक
सेहरा
की
वो
नज़र
आ
गया
सराबों
में
वो
किसी
को
बुरा
नहीं
कहते
एक
अच्छाई
है
ख़राबों
में
कोई
ग़म
हो
तो
मीर
पढ़ते
हैं
हम
नहीं
डूबते
शराबों
में
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Bhaskar Shukla
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शोर
में
आवाज़
मुदग़म
क्यूँ
करें
कर
रहे
हैं
जो
सभी
हम
क्यूँ
करें
सरफ़रोशी
की
तमन्ना
है
हमें
ज़ुल्म
के
आगे
नज़र
ख़म
क्यूँ
करें
रौशनी
के
वास्ते
जल
जाएँ
हम
तीरगी
का
ख़ैर-मक़्दम
क्यूँ
करें
रास्ता
हमने
चुना
है
सोचकर
मुश्किलें
तो
आएंगी,
ग़म
क्यूँ
करें
ये
तिरंगा
ही
हमारी
शान
है
हम
इसे
यकरंग
परचम
क्यूँ
करें
आप
अपनी
नफ़रतें
कम
कीजिए
हम
मोहोब्बत
को
भला
कम
क्यूँ
करें
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Bhaskar Shukla
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ना
तो
कुछ
सुनते
हैं
ना
ही
बोल
कुछ
पाते
हैं
हम
सामने
उनके
सरापा
आँख
हो
जाते
हैं
हम
वो
निगाहें
इन
निगाहों
से
कभी
हटती
नहीं
वरना
कितनी
ही
निगाहें
हैं
जिन्हें
भाते
हैं
हम
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Bhaskar Shukla
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मुश्किल
है
समझाना
इसको
दिल
के
पास
दिमाग़
नहीं
है
Bhaskar Shukla
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