jazba-e-ishq agar dil men na paida hota | जज़्बा-ए-इश्क़ अगर दिल में न पैदा होता

  - Panna Lal Noor
जज़्बा-ए-इश्क़अगरदिलमेंपैदाहोता
मैंसमझताहूँमिरेहक़मेंयेअच्छाहोता
इसक़दरशिद्दत-ए-ग़मपरतोयहीलाज़िमथा
दिलहोतामिरापत्थरकाकलेजाहोता
बे-ख़ुदीहैकितिरीबज़्ममेंलेआईहै
होशहोतातोयहाँकिसलिएरुस्वाहोता
इकनज़रदेखकेकुछऔरबढ़ादीवहशत
इससेअच्छातोयहीथाकिदेखाहोता
मुझकोमंज़ूरथीअपनीहीशोहरतवर्ना
मैंतोवोथाकिमिराअर्शपेचर्चाहोता
ज़ीस्तभीमौतभीदोनोंकेतुम्हींहोमालिक
मुंसिफ़ीयेथीकिहक़एकपेमेराहोता
कुछहक़ीक़तसहीहुस्न-ए-अक़ीदतहीसही
'नूर'जीनेकेलिएकुछतोसहाराहोता
  - Panna Lal Noor
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy