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Aks samastipuri
ham hain shauqeen puraani hi sharaabon ke dost
ham hain shauqeen puraani hi sharaabon ke dost | हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त
- Aks samastipuri
हम
हैं
शौक़ीन
पुरानी
ही
शराबों
के
दोस्त
हम
तो
हैं
ढलते
हुए
हुस्न
पे
मरने
वाले
- Aks samastipuri
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
Mehshar Afridi
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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अब
कारगह-ए-दहर
में
लगता
है
बहुत
दिल
ऐ
दोस्त
कहीं
ये
भी
तिरा
ग़म
तो
नहीं
है
Majrooh Sultanpuri
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अब
वो
तितली
है
न
वो
उम्र
तआ'क़ुब
वाली
मैं
न
कहता
था
बहुत
दूर
न
जाना
मिरे
दोस्त
Faisal Ajmi
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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यूँँ
तो
सर्कस
में
हम
बहुत
ख़ुश
हैं
फिर
भी
जंगल
तो
यार
जंगल
था
Harman Dinesh
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अव्वल
तो
तेरी
दोस्ती
पर
शक
नहीं
कोई
और
दूसरा
ये
मुझको
तेरे
राज़
पता
हैं
Tanoj Dadhich
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बहुत
मुश्किल
हुआ
रस्ता
हमारा
जब
उस
ने
खो
दिया
नक़्शा
हमारा
मिला
जब
रौशनी
से
मुद्दतों
बाद
लिपट
कर
रो
पड़ा
साया
हमारा
बहुत
महदूद
है
दुनिया
हमारी
नहीं
निभ
पाएगा
रिश्ता
हमारा
अगरचे
कोई
भी
आता
नहीं
था
खुला
रहता
था
दरवाज़ा
हमारा
नहीं
इस
में
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
बहुत
है
मुख़्तसर
क़िस्सा
हमारा
हमारी
कोई
क़ीमत
ही
नहीं
है
नहीं
कर
पाओगे
सौदा
हमारा
न
जाने
कौन
दस्तक
दे
गया
है
न
जाने
कौन
है
अपना
हमारा
तुम्हें
अपना
बनाया
बोल
कर
झूट
कहो
कैसा
लगा
धोका
हमारा
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एक
रिश्ता
जिसे
मैं
दे
न
सका
कोई
नाम
एक
रिश्ता
जिसे
ता-उम्र
निभाए
रक्खा
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
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धूप
में
जलते
हैं
तब
साया
बनता
है
बड़े
जतन
से
कोई
अपना
बनता
है
सारे
बिखरे
ख़्वाब
इकट्ठा
करने
पर
एक
मुकम्मल
तेरा
चेहरा
बनता
है
घर
के
दोनों
जानिब
दर
लगवाए
हैं
अब
तो
तेरा
दस्तक
देना
बनता
है
प्यार
करो
तो
एक
ख़राबी
ये
भी
है
हद
दर्जे
का
यार
तमाशा
बनता
है
उस
का
पहलू
सिर्फ़
मुयस्सर
है
मुझ
को
या'नी
मेरा
इतना
बनना
बनता
है
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ग़म
उठाने
का
हौसला
भी
नहीं
और
इस
के
बिना
मज़ा
भी
नहीं
साथ
तेरा
अज़ाब
है
मुझ
को
चाहिए
कोई
दूसरा
भी
नहीं
तुम
भला
क्यूँ
उदास
रहने
लगे
तुम
को
तो
यार
इश्क़
था
भी
नहीं
इश्क़
की
राह
से
गुज़रना
पड़ा
और
था
कोई
रास्ता
भी
नहीं
उन
को
दर-अस्ल
दूर
जाना
था
मसअला
इतना
था
बड़ा
भी
नहीं
ख़ुद
समझ
लो
मिरे
लिए
क्या
थे
आज
से
तुम
को
बद-दुआ'
भी
नहीं
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