ai hum-nafso shab hai giran jaagte rahna | ऐ हम-नफ़सो! शब है गिराँ जागते रहना

  - Owais Ahmad Dauran
हम-नफ़सो!शबहैगिराँजागतेरहना
हरलहज़ाहैयाँख़तरा-ए-जाँजागतेरहना
ऐसाहोयेरातकोईहश्रउठादे
उठताहैसितारोंसेधुआँजागतेरहना
अबहुस्नकीदुनियामेंभीआरामनहींहै
हैशोरसर-ए-कू-ए-बुताँजागतेरहना
येसेहन-ए-गुलिस्ताँनहींमक़्तलहैरफ़ीक़ो!
हरशाख़हैतलवारयहाँजागतेरहना
बे-दारोंकीदुनियाकभीलुटतीनहीं'दौराँ'
इकशम्अलिएतुमभीयहाँजागतेरहना
  - Owais Ahmad Dauran
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