manzar roz badal deta hooñ apni narm-khyaali se | मंज़र रोज़ बदल देता हूँ अपनी नर्म-ख़याली से

  - Obaid Siddiqi
मंज़ररोज़बदलदेताहूँअपनीनर्म-ख़यालीसे
शामशफ़क़मेंढलजातीहैरंग-ए-हिनाकीलालीसे
तुझसेबिछड़करज़िंदारहनाअपनेसोगमेंजीनाहै
दिलइकफूलथाख़ुश्बूवालाटूटगयाहैडालीसे
शहर-ए-तरबकोजानेकिसकीनज़रलगीहैआजकीशब
रस्तेभीवीरानपड़ेहैंघरलगतेहैंख़ालीसे
दुनियावालेजिसकोअक्सररोना-धोनाकहतेहैं
आँखेंदरियाबनजातीहैजज़्बोंकीसय्यालीसे
धूल-भरेरस्तोंकेसफ़रनेतर्ज़-ए-फ़िक्रबदलडाला
ख़ौफ़-ज़दासीरहनेलगीहैख़ाक-ए-बदनपामालीसे
  - Obaid Siddiqi
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