kab tak us ka hijr manaata sehra chhod diya | कब तक उस का हिज्र मनाता सहरा छोड़ दिया

  - Obaid Siddiqi
कबतकउसकाहिज्रमनातासहराछोड़दिया
जीनेकीउम्मीदमेंमैंनेक्याक्याछोड़दिया
मेरेसाथलगारहताहैयादोंकाबादल
धूप-भरेरस्तोंपरउसनेसायाछोड़दिया
हरचेहरेपरइकचेहरेकाधोकाहोताहै
किसनेमुझकोइसबस्तीमेंतन्हाछोड़दिया
दुनियासबकुछजानगईहैमेरेबारेमें
बिंत-ए-अलमनेना-महरमसेपर्दाछोड़दिया
पहलेपहलेख़ौफ़बहुतआताथामरनेसे
फिरवोमंज़िलआईमैंनेडरनाछोड़दिया
  - Obaid Siddiqi
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