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Atul K Rai
jise manzil bataaya ja raha tha
jise manzil bataaya ja raha tha | जिसे मंज़िल बताया जा रहा था
- Atul K Rai
जिसे
मंज़िल
बताया
जा
रहा
था
वो
रस्ते
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
है
- Atul K Rai
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बाद
तेरे
नहीं
कोई
हमें
मंज़िल
की
तलब
हमने
सोचा
है
कि
हम
राह
भटक
जाएँगे
Prince
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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औरों
का
बताया
हुआ
रस्ता
नहीं
चुनते
जो
इश्क़
चुना
करते
हैं,
दुनिया
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
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हर
तरफ़
उग
आए
हैं
जंगल
हमारी
हार
के
जीत
का
कोई
भी
रस्ता
अब
नहीं
दिखता
हमें
Siddharth Saaz
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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कोशिश
भी
कर
उमीद
भी
रख
रास्ता
भी
चुन
फिर
इस
के
ब'अद
थोड़ा
मुक़द्दर
तलाश
कर
Nida Fazli
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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तुम्हारी
शक्ल
किसी
शक्ल
से
मिलाते
हुए
मैं
खो
गया
हूँ
नया
रास्ता
बनाते
हुए
Ashu Mishra
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अपने
हिस्से
में
वही
तस्वीर
है
जिस
में
सब
कुछ
है
ख़ुशी
को
छोड़
कर
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Atul K Rai
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लगा
दो
अब
किनारे
नाव
या
फिर
भँवर
पैदा
करो
यह
डूब
जाए
Atul K Rai
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नींद
में
ख़ाब
कैसे
सजाते
थे
हम
चूम
कर
गाल
कैसे
लजाते
थे
हम
आज
तक
प्रश्न
का
हल
मिला
ही
नहीं
आग
पानी
में
कैसे
लगाते
थे
हम
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Atul K Rai
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आँच
अगर
आए
आधी
आबादी
पर
समझो
पूरी
मानवता
ख़तरे
में
है
Atul K Rai
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फासले
दरमियाँ
आजकल
हो
गए
क्यूँँ
जो
अमृत
रहे
वो
गरल
हो
गए
आपका
देखना
क्या
ग़ज़ब
कर
गया
प्रश्न
जितने
रहे
सारे
हल
हो
गए
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Atul K Rai
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