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Atul K Rai
laga do ab kinaare naav ya phir
laga do ab kinaare naav ya phir | लगा दो अब किनारे नाव या फिर
- Atul K Rai
लगा
दो
अब
किनारे
नाव
या
फिर
भँवर
पैदा
करो
यह
डूब
जाए
- Atul K Rai
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इतने
गहरे
उतर
गया
हूँ
दरिया-ए-दर्द-ए-दिल
में
हाथ
पकड़
कर
खींच
ले
वरना
डूब
के
भी
मर
सकता
हूँ
कट्टे
ख़ंजर
रस्सी
माचिस
कुछ
दिन
मुझ
सेे
दूर
रखो
कुछ
करने
से
चूक
गया
हूँ
मैं
कुछ
भी
कर
सकता
हूँ
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Vashu Pandey
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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उनकी
आँखें
झील
हैं
तो
क्या
करें
डूब
जाएँ
काम
धंधा
छोड़
दें?
Saurabh Sharma 'sadaf'
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आज
की
रात
न
जाने
कितनी
लंबी
होगी
आज
का
सूरज
शाम
से
पहले
डूब
गया
है
Aanis Moin
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बग़ैर
चश्में
के
जो
देख
भी
न
पाता
है
वो
बेवक़ूफ़
मुझे
देखना
सिखाता
है
अगर
ये
वक़्त
डुबोएगा
मेरी
नाव
को
तो
इस
सेे
कह
दो
मुझे
तैरना
भी
आता
है
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Vikram Gaur Vairagi
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
Siraj Faisal Khan
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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ख़बर
नहीं
है
आगे
क्या-क्या
होने
वाला
साथ
मेरे
अच्छे
ख़ासे
नाटक
का
कितना
घटिया
क़िरदार
हूँ
मैं
Atul K Rai
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धरा
का
स्खलन
भारी
पड़ेगा
सुनो
यह
उत्खनन
भारी
पड़ेगा
समुंदर
का
अभी
गौना
हुआ
है
किनारे
पर
मिलन
भारी
पड़ेगा
कहाँ
तुम
गोपियों
को
जानते
थे
कहा
था
ना
गमन
भारी
पड़ेगा
चले
जाना
नियति
है
मान
लो
अब
चले
जाओ
वरन
भारी
पड़ेगा
पुराने
दिन
पुनः
अँखुआ
रहे
हैं
नये
दिन
का
सृजन
भारी
पड़ेगा
अभी
तो
शेष
है
गहनों
की
थिरकन
बिना
गहना
बदन
भारी
पड़ेगा
अतुल
तुम
ढीठ
होते
जा
रहे
हो
गुलाबी
यह
व्यसन
भारी
पड़ेगा
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Atul K Rai
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लगाऊँ
हाज़िरी
मैं
भी
समय
से
किसी
स्कूल
में
दाख़िल
करा
दो
सुलहनामा
लिए
दर
पे
खड़ा
हूँ
मुक़दमा
कोर्ट
से
ख़ारिज
करा
दो
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Atul K Rai
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दो
ही
जैसे
काम
बचे
हों
जीवन
में
इश्क़
के
मारे
रोते
हैं
या
सोते
हैं
Atul K Rai
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वो
क़ुर्बां
कर
चुके
थे
पंख
इक
दूजे
की
ख़ातिर
हवा
में
इसलिए
दोनों
बराबर
उड़
रहे
थे
Atul K Rai
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