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Atul K Rai
lagaaun haaziri main bhi samay se
lagaaun haaziri main bhi samay se | लगाऊँ हाज़िरी मैं भी समय से
- Atul K Rai
लगाऊँ
हाज़िरी
मैं
भी
समय
से
किसी
स्कूल
में
दाख़िल
करा
दो
सुलहनामा
लिए
दर
पे
खड़ा
हूँ
मुक़दमा
कोर्ट
से
ख़ारिज
करा
दो
- Atul K Rai
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
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कोहरा
तो
इस
उदासी
का
घना
है
और
सबका
दिल
भी
पत्थर
का
बना
है
रोने
से
मन
हल्का
होता
होगा
लेकिन
मैं
तो
लड़का
हूँ,
मुझे
रोना
मना
है
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Daqiiq Jabaali
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वो
देखने
मुझे
आना
तो
चाहता
होगा
मगर
ज़माने
की
बातों
से
डर
गया
होगा
Habib Jalib
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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इस
ख़ौफ़
में
कि
ख़ुद
न
भटक
जाएँ
राह
में
भटके
हुओं
को
राह
दिखाता
नहीं
कोई
Anwar Taban
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हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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इतनी
सख़्ती
से
भी
पेश
न
आओ
आप
मुहब्बत
में
पत्थर
अपने
पत्थर
होने
पर
शरमाने
लग
जाए
Atul K Rai
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किसी
तैराक
से
पूछो
कहाँ
कितना
है
पानी
गरीबी
चीज़
क्या
है
सिर्फ़
मुफ़लिस
जानते
हैं
Atul K Rai
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मुझको
भी
ज़िद
करने
का
हक़
दो
साहब
मेरे
भीतर
भी
इक
बच्चा
रहता
है
Atul K Rai
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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एक
झटके
में
हरा
देता
है
वो
डाँटने
पर
मुस्करा
देता
है
वो
तुम
अकेले
ही
नहीं
जो
मिट
गए
रोज़
लिखता
है
मिटा
देता
है
वो
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Atul K Rai
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