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Atul K Rai
ek jhatke men haraa deta hai vo
ek jhatke men haraa deta hai vo | एक झटके में हरा देता है वो
- Atul K Rai
एक
झटके
में
हरा
देता
है
वो
डाँटने
पर
मुस्करा
देता
है
वो
तुम
अकेले
ही
नहीं
जो
मिट
गए
रोज़
लिखता
है
मिटा
देता
है
वो
- Atul K Rai
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
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जनमदिन
हिज्र
का
कुछ
यूँँ
मनाया
किया
अनब्लॉक
तुमको
आज
हमने
Tanoj Dadhich
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उसकी
टीस
नहीं
जाती
है
सारी
उम्र
पहला
धोखा
पहला
धोखा
होता
है
Shariq Kaifi
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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यूँँ
तो
वो
इत्रदान
था
लेकिन
ये
क्या
हुआ
टूटा
तो
एक
सम्त
भी
ख़ुशबू
नहीं
गई
Afzal Ali Afzal
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फिर
से
तस्वीर
दिख
गई
उसकी
फिर
से
दीवार
हो
रहे
हैं
हम
Atul K Rai
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कोई
कन्धा
नहीं
है
रोने
को
आग
लग
जाए
इस
कमाई
में
Atul K Rai
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क़ैद
में
भी
चैन
से
रहने
नहीं
देता
है
वो
डर
लगा
रहता
है
जाने
कब
रिहा
कर
दे
हमें
Atul K Rai
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चलो
न
फिर
से
दरिया
के
नज़दीक
चलें
चलो
न
फिर
से
डुबकी
साथ
लगाएँगे
Atul K Rai
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इक
अदद
जो
घर
न
पाए
आज
तक
मर
के
भी
वो
मर
न
पाए
आज
तक
उनका
बिस्तर
था
धरा
चद्दर
गगन
क्या
हुआ
कुछ
ग़र
न
पाए
आज
तक
चार
दिन
का
ही
तो
केवल
काम
था
ख़त्म
लेकिन
कर
न
पाए
आज
तक
क्या
बताएंगे
वो
रस्ता
यार
जो
राह
में
पत्थर
न
पाए
आज
तक
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Atul K Rai
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