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Atul K Rai
kisi tairaak se poochho kahaan kitna hai paani
kisi tairaak se poochho kahaan kitna hai paani | किसी तैराक से पूछो कहाँ कितना है पानी
- Atul K Rai
किसी
तैराक
से
पूछो
कहाँ
कितना
है
पानी
गरीबी
चीज़
क्या
है
सिर्फ़
मुफ़लिस
जानते
हैं
- Atul K Rai
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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इसी
लिए
तो
है
ज़िंदाँ
को
जुस्तुजू
मेरी
कि
मुफ़लिसी
को
सिखाई
है
सर-कशी
मैं
ने
Ali Sardar Jafri
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दफ़्तरी
से
तो
फ़क़त
रोटी
ही
चल
सकती
है
अपनी
साँसों
की
ख़ातिर
ज़रूरी
शा'इरी
करना
है
साहिब
Harsh saxena
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पराई
आग
पे
रोटी
नहीं
बनाऊँगा
मैं
भीग
जाऊँगा
छतरी
नहीं
बनाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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ये
टूटी
चटाई
ये
मिटटी
का
बर्तन
हिकारत
से
नादान
क्या
देखता
है
गरीबी
मोहम्मद
के
घर
में
पली
है
मेरे
घर
का
सामान
क्या
देखता
है
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Anjuman rahi raza
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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राम
सिया
के
बीच
रहा
जो
प्रेम
मिले
अंतस
के
रावण
की
लंका
जल
जाए
Atul K Rai
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उसपे
हम
चीख़
ही
नहीं
सकते
उसकी
चुप्पी
कमाल
करती
है!
Atul K Rai
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आँसू
चाट
रहे
हैं
अब
की
तिश्ना-लब
हाँ
ये
बात
अलग
है
दरिया
दूर
नहीं
Atul K Rai
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सत्य
यही
है
इक
दिन
सबको
मर
ही
जाना
है
ठीक
नहीं
पर
रोज़
यहाँ
अब
मरते
जाना
बस
Atul K Rai
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ज़रा
सी
देर
उठने
में
हुई
क्या
लगे
सब
पाँव
दक्षिण
ओर
करने
Atul K Rai
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