main fard-e-jurm teri taiyyaar kar raha hooñ | मैं फ़र्द-ए-जुर्म तेरी तय्यार कर रहा हूँ

  - Obaid Siddiqi
मैंफ़र्द-ए-जुर्मतेरीतय्यारकररहाहूँ
आसमानसुनलेहुश्यारकररहाहूँ
इकहदबनारहाहूँशहर-ए-हवसमेंअपनी
दरखोलनेकीख़ातिरदीवारकररहाहूँ
मालूमहैहोगीपूरीयेआरज़ूभी
फिरदिलकोबे-सबबक्यूँँबीमारकररहाहूँ
फूलों-भरीयेशाख़ेंबाँहोंसीलगरहीहैं
अबक्याबताऊँकिसकादीदारकररहाहूँ
येरास्तेकिजिनपरचलतारहाहूँबरसों
आइंदगाँकीख़ातिरहमवारकररहाहूँ
आसानियोंमेंजीनामुश्किलसाहोगयाहै
मैंज़िंदगीकोथोड़ादुश्वारकररहाहूँ
सा
मेंबनालियाहैरातोंकोमैंनेअपना
ग़ज़लेंसुनासुनाकेसरशारकररहाहूँ
  - Obaid Siddiqi
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