kya sune koi zabaani meri | क्या सुने कोई ज़बानी मेरी

  - Obaid Siddiqi
क्यासुनेकोईज़बानीमेरी
औरफिरवोभीकहानीमेरी
शहरसहराकीतरहलगताहै
राएगाँनक़्ल-ए-मकानीमेरी
एकचेहरामिरेचेहरेसेअलग
एकतस्वीरपुरानीमेरी
मैंकिदरियाथाजोअबसाकितहूँ
खोगईमुझमेंरवानीमेरी
रातशबनममेंबहुतभीगाथा
देखअबशोला-फ़िशानीमेरी
  - Obaid Siddiqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy