humeen pe tang ye waqt-e-ravaan hua to kya | हमीं पे तंग ये वक़्त-ए-रवाँ हुआ तो क्या

  - Nadeem Fazli
हमींपेतंगयेवक़्त-ए-रवाँहुआतोक्या
दराज़औरभीकार-ए-जहाँहुआतोक्या
येसुर्ख़तलवेयेतन्हाईआख़िरीहिचकी
अबइससेआगेकोईकारवाँहुआतोक्या
येरास्तेहैंबुज़ुर्गोंकीख़ाकसेरौशन
सोमैंभीचलकेयहींराएगाँहुआतोक्या
यहाँतोशहरहीआतिश-फ़िशाँकीज़दपरहै
जोअपनेसीनेमेंथोड़ाधुआँहुआतोक्या
ग़ुरूरयूँँहैकिउसकेगदागरोंमेंहूँ
बराएख़ल्क़मैंशाह-ए-जहाँहुआतोक्या
हमींनेदीथीजगहउसकोअपनीपलकोंमें
वोज़र्राआजजोकोह-ए-गिराँहुआतोक्या
जोकरसकाकिसीतौरमुतमइनख़ुदको
सवालउठताहैमोजिज़-बयाँहुआतोक्या
तमामलोगसमा'अतसेहोगएमहरूम
तबअपनालहजाग़ज़लकीज़बाँहुआतोक्या
'नदीम'आँखमेंआँसूहैसारेआलमका
वतनहमाराजोहिन्दोस्ताँहुआतोक्या
  - Nadeem Fazli
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