raaz-e-fitrat se ayaan ho koi manzar koi dhun | राज़-ए-फ़ितरत से अयाँ हो कोई मंज़र कोई धुन

  - Nadeem Fazli
राज़-ए-फ़ितरतसेअयाँहोकोईमंज़रकोईधुन
साज़-ए-हस्तीसेभीनिकलेकोईपैकरकोईधुन
मैंवोआवाज़जोअबतकहैसमाअ'तसेपरे
मैंवोनग़्माअभीउतरीनहींजिसपरकोईधुन
इकग़ज़लछेड़केरोतारहामुझमेंकोई
इकसमाँबाँधकेहँसतीरहीमुझपरकोईधुन
ऊँघनेलगतीहैजबपाँवकेछालोंकीतपक
छेड़देतेहैंमिरीराहकेपत्थरकोईधुन
अक़्लफ़रमानसुनातीरहीटूटाजुमूद
रक़्स-ए-वहशतकातक़ाज़ाथामुकर्ररकोईधन
वक़्तकीलयसेहम-आहंगजोहोताहूँनदीम
बैनकरतीहैकहींरूहकेअंदरकोईधुन
  - Nadeem Fazli
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