laazim tha ki dekho mira rastaa koi din aur | लाज़िम था कि देखो मिरा रस्ता कोई दिन और

  - Mirza Ghalib
लाज़िमथाकिदेखोमिरारस्ताकोईदिनऔर
तन्हागएक्यूँँअबरहोतन्हाकोईदिनऔर
मिटजाएगासरगरतिरापत्थरघिसेगा
हूँदरपेतिरेनासिया-फ़रसाकोईदिनऔर
आएहोकलऔरआजहीकहतेहोकिजाऊँ
मानाकिहमेशानहींअच्छाकोईदिनऔर
जातेहुएकहतेहोक़यामतकोमिलेंगे
क्याख़ूबक़यामतकाहैगोयाकोईदिनऔर
हाँफ़लक-ए-पीरजवाँथाअभीआरिफ़
क्यातेराबिगड़ताजोमरताकोईदिनऔर
तुममाह-ए-शब-ए-चार-दहुमथेमिरेघरके
फिरक्यूँँरहाघरकावोनक़्शाकोईदिनऔर
तुमकौनसेथेऐसेखरेदाद-ओ-सितदके
करतामलक-उल-मौततक़ाज़ाकोईदिनऔर
मुझसेतुम्हेंनफ़रतसहीनय्यरसेलड़ाई
बच्चोंकाभीदेखातमाशाकोईदिनऔर
गुज़रीब-हर-हालयेमुद्दतख़ुशना-ख़ुश
करनाथाजवाँ-मर्गगुज़ाराकोईदिनऔर
नादाँहोजोकहतेहोकिक्यूँँजीतेहैं'ग़ालिब'
क़िस्मतमेंहैमरनेकीतमन्नाकोईदिनऔर
  - Mirza Ghalib
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