aa ki mirii jaan ko qaraar nahin hai | आ कि मिरी जान को क़रार नहीं है

  - Mirza Ghalib
किमिरीजानकोक़रारनहींहै
ताक़त-ए-बेदाद-ए-इंतिज़ारनहींहै
देतेहैंजन्नतहयात-ए-दहरकेबदले
नश्शाब-अंदाज़ा-ए-ख़ुमारनहींहै
गिर्यानिकालेहैतेरीबज़्मसेमुझको
हाएकिरोनेपेइख़्तियारनहींहै
हमसेअबसहैगुमान-ए-रंजिश-ए-ख़ातिर
ख़ाकमेंउश्शाक़कीग़ुबारनहींहै
दिलसेउठालुत्फ़-ए-जल्वा-हा-ए-मआनी
ग़ैर-ए-गुलआईना-ए-बहारनहींहै
क़त्लकामेरेकियाहैअहदतोबारे
वाएअगरअहदउस्तुवारनहींहै
तूनेक़सममय-कशीकीखाईहै'ग़ालिब'
तेरीक़समकाकुछए'तिबारनहींहै
  - Mirza Ghalib
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