jab tak dahan-e-zakhm na paida kare koi | जब तक दहान-ए-ज़ख़्म न पैदा करे कोई

  - Mirza Ghalib
जबतकदहान-ए-ज़ख़्मपैदाकरेकोई
मुश्किलकितुझसेराह-ए-सुख़नवाकरेकोई
आलमग़ुबार-ए-वहशत-ए-मजनूँहैसर-ब-सर
कबतकख़याल-ए-तुर्रा-ए-लैलाकरेकोई
अफ़्सुर्दगीनहींतरब-इंशा-ए-इल्तिफ़ात
हाँदर्दबनकेदिलमेंमगरजाकरेकोई
रोनेसेनदीममलामतकरमुझे
आख़िरकभीतोउक़्दा-ए-दिलवाकरेकोई
चाक-ए-जिगरसेजबरह-ए-पुर्सिशवाहुई
क्याफ़ाएदाकिजैबकोरुस्वाकरेकोई
लख़्त-ए-जिगरसेहैरग-ए-हर-ख़ारशाख़-ए-गुल
ताचंदबाग़-बानी-ए-सहराकरेकोई
नाकामी-ए-निगाहहैबर्क़-ए-नज़ारा-सोज़
तूवोनहींकितुझकोतमाशाकरेकोई
हरसंगख़िश्तहैसदफ़-ए-गौहर-ए-शिकस्त
नुक़साँनहींजुनूँसेजोसौदाकरेकोई
सरबरहुईवादा-ए-सब्र-आज़मासेउम्र
फ़ुर्सतकहाँकितेरीतमन्नाकरेकोई
हैवहशत-ए-तबीअत-ए-ईजादयास-खेज़
येदर्दवोनहींकिपैदाकरेकोई
बेकारी-ए-जुनूँकोहैसरपीटनेकाशुग़्ल
जबहाथटूटजाएँतोफिरक्याकरेकोई
हुस्न-ए-फ़रोग़-ए-शम्मा-ए-सुख़नदूरहै'असद'
पहलेदिल-ए-गुदाख़्तापैदाकरेकोई
वहशतकहाँकिबे-ख़ुदीइंशाकरेकोई
हस्तीकोलफ़्ज़-ए-मानी-ए-अन्क़ाकरेकोई
जोकुछहैमहव-ए-शोख़ी-ए-अबरू-ए-यारहै
आँखोंकोरखकेताक़पेदेखाकरेकोई
अर्ज़-ए-सरिश्कपरहैफ़ज़ा-ए-ज़मानातंग
सहराकहाँकिदावत-ए-दरियाकरेकोई
वोशोख़अपनेहुस्नपेमग़रूरहै'असद'
दिखलाकेउसकोआइनातोड़ाकरेकोई
  - Mirza Ghalib
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy