lataafat be-kasaafat jalwa paida kar nahin sakti | लताफ़त बे-कसाफ़त जल्वा पैदा कर नहीं सकती

  - Mirza Ghalib
लताफ़तबे-कसाफ़तजल्वापैदाकरनहींसकती
चमनज़ंगारहैआईना-ए-बाद-ए-बहारीका
हरीफ़-ए-जोशिश-ए-दरियानहींख़ुद्दारी-ए-साहिल
जहाँसाक़ीहोतूबातिलहैदा'वाहोशियारीका
बहार-ए-रंग-ए-ख़ून-ए-गुलहैसामाँअश्क-बारीका
जुनून-ए-बर्क़नश्तरहैरग-ए-अब्र-ए-बहारीका
बरा-ए-हल्ल-ए-मुश्किलहूँज़ि-पाउफ़्तादा-ए-हसरत
बँधाहैउक़्दा-ए-ख़ातिरसेपैमाँख़ाकसारीका
ब-वक़्त-ए-सर-निगूनीहैतसव्वुरइंतिज़ारिस्ताँ
निगहकोआबलोंसेशग़्लहैअख़्तर-शुमारीका
'असद'साग़र-कश-ए-तस्लीमहोगर्दिशसेगर्दूंकी
किनंग-ए-फ़हम-ए-मस्ताँहैगिलाबद-रोज़गारीका
  - Mirza Ghalib
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