bazm-e-shahanshaah men ashaar ka daftar khula | बज़्म-ए-शाहंशाह में अशआ'र का दफ़्तर खुला

  - Mirza Ghalib
बज़्म-ए-शाहंशाहमेंअशआ'रकादफ़्तरखुला
रखियोयारबयेदर-ए-गंजीना-ए-गौहरखुला
शबहुईफिरअंजुम-ए-रख़्शन्दाकामंज़रखुला
इसतकल्लुफ़सेकिगोयाबुत-कदेकादरखुला
गरचेहूँदीवानापरक्यूँँदोस्तकाखाऊँफ़रेब
आस्तींमेंदशनापिन्हाँहाथमेंनश्तरखुला
गोसमझूँउसकीबातेंगोपाऊँउसकाभेद
परयेक्याकमहैकिमुझसेवोपरी-पैकरखुला
हैख़याल-ए-हुस्नमेंहुस्न-ए-अमलकासाख़याल
ख़ुल्दकाइकदरहैमेरीगोरकेअंदरखुला
मुँहखुलनेपरहैवोआलमकिदेखाहीनहीं
ज़ुल्फ़सेबढ़करनक़ाबउसशोख़केमुँहपरखुला
दरपेरहनेकोकहाऔरकहकेकैसाफिरगया
जितनेअर्सेमेंमिरालिपटाहुआबिस्तरखुला
क्यूँँअँधेरीहैशब-ए-ग़महैबलाओंकानुज़ूल
आजउधरहीकोरहेगादीदा-ए-अख़्तरखुला
क्यारहूँग़ुर्बतमेंख़ुशजबहोहवादिसकायेहाल
नामालाताहैवतनसेनामा-बरअक्सरखुला
उसकीउम्मतमेंहूँमैंमेरेरहेंक्यूँँकामबंद
वास्तेजिसशहके'ग़ालिब'गुम्बद-ए-बे-दरखुला
  - Mirza Ghalib
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