khamoshiyon men tamasha ada nikalti hai | ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है

  - Mirza Ghalib
ख़मोशियोंमेंतमाशाअदानिकलतीहै
निगाहदिलसेतिरेसुर्मा-सानिकलतीहै
फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वतसेबनतीहैशबनम
सबाजोग़ुंचेकेपर्देमेंजानिकलतीहै
पूछसीना-ए-आशिक़सेआब-ए-तेग़-ए-निगाह
किज़ख्म-ए-रौज़न-ए-दरसेहवानिकलतीहै
ब-रंग-ए-शीशाहूँयक-गोश-ए-दिल-ए-ख़ाली
कभीपरीमिरीख़ल्वतमेंनिकलतीहै
  - Mirza Ghalib
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy