muzda ai zauq-e-aseeri ki nazar aata hai | मुज़्दा ऐ ज़ौक़-ए-असीरी कि नज़र आता है

  - Mirza Ghalib
मुज़्दाज़ौक़-ए-असीरीकिनज़रआताहै
दाम-ए-ख़ालीक़फ़स-ए-मुर्ग़-ए-गिरफ़्तारकेपास
जिगर-ए-तिश्ना-ए-आज़ारतसल्लीहुआ
जू-ए-ख़ूँहमनेबहाईबुन-ए-हरख़ारकेपास
मुँदगईंखोलतेहीखोलतेआँखेंहैहै
ख़ूबवक़्तआएतुमइसआशिक़-ए-बीमारकेपास
मैंभीरुकरुककेमरताजोज़बाँकेबदले
दशनाइकतेज़साहोतामिरेग़म-ख़्वारकेपास
दहन-ए-शेरमेंजाबैठेलेकिनदिल
खड़ेहोजिएख़ूबान-ए-दिल-आज़ारकेपास
देखकरतुझकोचमनबस-किनुमूकरताहै
ख़ुद-ब-ख़ुदपहुँचेहैगुलगोशा-ए-दस्तारकेपास
मरगयाफोड़केसरग़ालिब-ए-वहशीहैहै
बैठनाउसकावोकरतिरीदीवारकेपास
  - Mirza Ghalib
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