hairaan hooñ dil ko rooun ki peetoon jigar ko main | हैराँ हूँ दिल को रोऊँ कि पीटूँ जिगर को मैं

  - Mirza Ghalib
हैराँहूँदिलकोरोऊँकिपीटूँजिगरकोमैं
मक़्दूरहोतोसाथरखूँनौहागरकोमैं
छोड़ारश्कनेकितिरेघरकानामलूँ
हरइकसेपूछताहूँकिजाऊँकिधरकोमैं
जानापड़ारक़ीबकेदरपरहज़ारबार
काशजानतातिरेरह-गुज़रकोमैं
हैक्याजोकसकेबाँधिएमेरीबलाडरे
क्याजानतानहींहूँतुम्हारीकमरकोमैं
लोवोभीकहतेहैंकियेबे-नंग-ओ-नामहै
येजानताअगरतोलुटाताघरकोमैं
चलताहूँथोड़ीदूरहरइकतेज़-रौकेसाथ
पहचानतानहींहूँअभीराहबरकोमैं
ख़्वाहिशकोअहमक़ोंनेपरस्तिशदियाक़रार
क्यापूजताहूँउसबुत-ए-बेदाद-गरकोमैं
फिरबे-ख़ुदीमेंभूलगयाराह-ए-कू-ए-यार
जातावगर्नाएकदिनअपनीख़बरकोमैं
अपनेपेकररहाहूँक़यासअहल-ए-दहरका
समझाहूँदिल-पज़ीरमता-ए-हुनरकोमैं
'ग़ालिब'ख़ुदाकरेकिसवार-ए-समंद-नाज़
देखूँअलीबहादुर-ए-आली-गुहरकोमैं
  - Mirza Ghalib
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy