na hui gar mire marne se tasalli na sahi | न हुई गर मिरे मरने से तसल्ली न सही

  - Mirza Ghalib
हुईगरमिरेमरनेसेतसल्लीसही
इम्तिहाँऔरभीबाक़ीहोतोयेभीसही
ख़ारख़ार-ए-अलम-ए-हसरत-ए-दीदारतोहै
शौक़गुल-चीन-ए-गुलिस्तान-ए-तसल्लीसही
मय-परस्ताँख़ुम-ए-मयमुँहसेलगाएहीबने
एकदिनगरहुआबज़्ममेंसाक़ीसही
नफ़स-ए-क़ैसकिहैचश्म-ओ-चराग़-ए-सहरा
गरनहींशम-ए-सियह-ख़ाना-ए-लैलीसही
एकहंगा
मेंपेमौक़ूफ़हैघरकीरौनक़
नौहा-ए-ग़महीसहीनग़्मा-ए-शादीसही
सताइशकीतमन्नासिलेकीपर्वा
गरनहींहैंमिरेअशआ'रमेंमा'नीसही
इशरत-ए-सोहबत-ए-ख़ूबाँहीग़नीमतसमझो
हुई'ग़ालिब'अगरउम्र-ए-तबीईसही
  - Mirza Ghalib
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