us bazm men mujhe nahin banti haya ki.e | उस बज़्म में मुझे नहीं बनती हया किए

  - Mirza Ghalib
उसबज़्ममेंमुझेनहींबनतीहयाकिए
बैठारहाअगरचेइशारेहुआकिए
दिलहीतोहैसियासत-ए-दरबाँसेडरगया
मैंऔरजाऊँदरसेतिरेबिनसदाकिए
रखताफिरूँहूँख़िर्क़ासज्जादारहन-ए-मय
मुद्दतहुईहैदावतआब-ओ-हवाकिए
बे-सर्फ़ाहीगुज़रतीहैहोगरचेउम्र-ए-ख़िज़्र
हज़रतभीकलकहेंगेकिहमक्याकियाकिए
मक़्दूरहोतोख़ाकसेपूछूँकिलईम
तूनेवोगंज-हा-ए-गराँ-मायाक्याकिए
किसरोज़तोहमतेंतराशाकिएअदू
किसदिनहमारेसरपेआरेचलाकिए
सोहबतमेंग़ैरकीपड़ीहोकहींयेख़ू
देनेलगाहैबोसाबग़ैरइल्तिजाकिए
ज़िदकीहैऔरबातमगरख़ूबुरीनहीं
भूलेसेउसनेसैकड़ोंवा'देवफ़ाकिए
'ग़ालिब'तुम्हींकहोकिमिलेगाजवाबक्या
मानाकितुमकहाकिएऔरवोसुनाकिए
  - Mirza Ghalib
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