pahli jaisi hi kashish aaj bhi hai | पहली जैसी ही कशिश आज भी है

  - M. K. Asar
पहलीजैसीहीकशिशआजभीहै
कलजोथीउनकीरविशआजभीहै
कलभीइंसाफ़कासरकटताथा
जुर्मपरदाद-ओ-दहिशआजभीहै
कलजोख़्वाहिशथीतन-आसानीकी
वहीपहलूमेंख़लिशआजभीहै
ज़ेहनकाकैसाहैरिश्तामज़बूत
अपनेमलबेमेंकशिशआजभीहै
आगसेआगबुझाईगई
राखसेलिपटीतपिशआजभीहै
शबकीज़ुल्मतकावहीग़महै'असर'
दूसरेदिनकीकशिशआजभीहै
  - M. K. Asar
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