fana ki samt chala hooñ baqa main kya jaanoon | फ़ना की सम्त चला हूँ बक़ा मैं क्या जानूँ

  - M. K. Asar
फ़नाकीसम्तचलाहूँबक़ामैंक्याजानूँ
येकैसीबातहैउसकीरज़ामैंक्याजानूँ
दयार-ए-फ़िक्रपेतारीहैनज़्अ'काआलम
हूँज़िंदालाशज़मींपरदु'आमैंक्याजानूँ
अज़लसेआजतलकबटरहाहूँक़िस्तोंमें
मिलेगीइससेभीबढ़करसज़ामैंक्याजानूँ
हैमेरेदिलमेंभीहसरतकहूँअनल-हक़मैं
नसीबहोगीकबउसकीरज़ामैंक्याजानूँ
हयातरिश्ता-ए-ज़ंजीरमेंहैसिमटीहुई
नजातदेगामुझेकबख़ुदामैंक्याजानूँ
हदोंसेअपनीगुज़रनेकीज़िदपेक़ाएमहै
समझसेबालाहैउसकीअदामैंक्याजानूँ
'असर'मैंसुनतोरहाहूँहवाकीसरगोशी
कहींबदलहीजाएफ़ज़ामैंक्याजानूँ
  - M. K. Asar
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