dast-e-gham se guzar raha hooñ main | दश्त-ए-ग़म से गुज़र रहा हूँ मैं

  - Kamal Jafari
दश्त-ए-ग़मसेगुज़ररहाहूँमैं
तीरगीमेंनिखररहाहूँमैं
वक़्तनेक़द्रकीनहींवर्ना
वक़्तकाहम-सफ़ररहाहूँमैं
बिखराबिखराहूँएकमुद्दतसे
रफ़्तारफ़्तासँवररहाहूँमैं
ख़ुद-नुमाईकीहरबुलंदीसे
ज़ीनाज़ीनाउतररहाहूँमैं
शुक्रतेराकिजुनून-ए-सफ़र
ख़ुदसेभीबे-ख़बररहाहूँमैं
नाममेरा'कमाल'हैलेकिन
उम्रभरबे-असररहाहूँमैं
  - Kamal Jafari
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