tujhe rahe na rahe rabt-e-baahmi ka khayal | तुझे रहे न रहे रब्त-ए-बाहमी का ख़याल

  - Kamal Jafari
तुझेरहेरहेरब्त-ए-बाहमीकाख़याल
मगरमुझेतोहैआदाब-ए-दोस्तीकाख़याल
तड़परहाथातिरीबज़्म-ए-नाज़मेंलेकिन
किसीनेभीकियामेरीबेबसीकाख़याल
पहुँचसकेगावोकिसतरहअपनीमंज़िलतक
जिसेज़राभीहोअपनीकजरवीकाख़याल
मुझेयक़ीनहैपालेगामंज़िलोंकेनिशाँ
वोकारवाँकिहोजिसकोगुमरहीकाख़याल
मिलोतोदोस्तबनोवर्नासाज़िशेंहीकरो
किदोस्तीमेंशामिलहोदुश्मनीकाख़याल
रह-ए-हयातमेंहमतोअभीहैंनौ-आमोज़
ख़ुदाकरेकिपैदाहोरहबरीकाख़याल
'कमाल'जैसेजहाँहोंगेचंदअहल-ए-जुनूँ
करसकेगावहाँकोईख़ुद-सरीकाख़याल
  - Kamal Jafari
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