abhii dukhi hooñ bahut aur bahut udaas hooñ main | अभी दुखी हूँ बहुत और बहुत उदास हूँ मैं

  - Kamal Jafari
अभीदुखीहूँबहुतऔरबहुतउदासहूँमैं
हँसूँतोकैसेकितस्वीर-ए-दर्द-ओ-यासहूँमैं
क़रीबरहकिभीतूमुझसेदूरदूररहा
येऔरबातकिबरसोंसेतेरेपासहूँमैं
भटकरहाहूँअभीख़ार-दारसहरामें
मगरमिज़ाज-ए-गुलिस्ताँसेरू-शनासहूँमैं
जोतीरगीमेंदियाबनकेरौशनीबख़्शे
उसए'तिमादकीहल्कीसीएकआसहूँमैं
ख़ुदअपनेहाथसेसीताहूँऔरपहनताहूँ
इसअहद-ए-नौकावोबिखराहुआलिबासहूँमैं
'कमाल'मुझकोनईनस्लयादरक्खेगी
किताब-ए-ज़ीस्तकाइकऐसाइक़्तिबासहूँमैं
  - Kamal Jafari
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