kaante hi kaante hain taa-hadd-e-nazar | काँटे ही काँटे हैं ता-हद्द-ए-नज़र

  - Kamal Jafari
काँटेहीकाँटेहैंता-हद्द-ए-नज़र
फिरभीताज़ाहैमिराअज़्म-ए-सफ़र
रहज़नोंकीरहनुमाईदेखकर
आजथर्रातीहैइकइकरहगुज़ार
ढोरहेहोकिसलिएपत्थरकाबोझ
होगएमिस्मारसबशीशेकेघर
चलिएवीरानोंमेंबसनेकेलिए
शहरतोबर्बादियोंकेहैंखंडर
गईसुब्ह-ए-तरबतोक्याहुआ
सूनासूनाहैमिरेदिलकानगर
जिनसेहोताहैफ़रोग़-ए-आज़री
आहवोकिसकामकेइल्म-ओ-हुनर
कामरानीपाँवचूमेगी'कमाल'
देखिएग़ैरोंकादामनछोड़कर
  - Kamal Jafari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy