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Mohammad Alvi
khidkiyon se jhaankti hai raushni
khidkiyon se jhaankti hai raushni | खिड़कियों से झाँकती है रौशनी
- Mohammad Alvi
खिड़कियों
से
झाँकती
है
रौशनी
बत्तियाँ
जलती
हैं
घर
घर
रात
में
- Mohammad Alvi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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गुज़रने
ही
न
दी
वो
रात
मैं
ने
घड़ी
पर
रख
दिया
था
हाथ
मैं
ने
Shahzad Ahmad
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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चराग़ों
को
आँखों
में
महफ़ूज़
रखना
बड़ी
दूर
तक
रात
ही
रात
होगी
Bashir Badr
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हर
एक
रात
को
महताब
देखने
के
लिए
मैं
जागता
हूँ
तिरा
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Azhar Inayati
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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परिंदे
दूर
फ़ज़ाओं
में
खो
गए
'अल्वी'
उजाड़
उजाड़
दरख़्तों
पे
आशियाने
थे
Mohammad Alvi
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गुल-दान
में
गुलाब
की
कलियाँ
महक
उठीं
कुर्सी
ने
उस
को
देख
के
आग़ोश
वा
किया
Mohammad Alvi
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और
बाज़ार
से
क्या
ले
जाऊँ
पहली
बारिश
का
मज़ा
ले
जाऊँ
कुछ
तो
सौग़ात
दूँ
घर
वालों
को
रात
आँखों
में
सजा
ले
जाऊँ
घर
में
सामाँ
तो
हो
दिलचस्पी
का
हादिसा
कोई
उठा
ले
जाऊँ
इक
दिया
देर
से
जलता
होगा
साथ
थोड़ी
सी
हवा
ले
जाऊँ
क्यूँँ
भटकता
हूँ
ग़लत
राहों
में
ख़्वाब
में
उस
का
पता
ले
जाऊँ
रोज़
कहता
है
हवा
का
झोंका
आ
तुझे
दूर
उड़ा
ले
जाऊँ
आज
फिर
मुझ
से
कहा
दरिया
ने
क्या
इरादा
है
बहा
ले
जाऊँ
घर
से
जाता
हूँ
तो
काम
आएँगे
एक
दो
अश्क
बचा
ले
जाऊँ
जेब
में
कुछ
तो
रहेगा
'अल्वी'
लाओ
तुम
सब
की
दु'आ
ले
जाऊँ
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Mohammad Alvi
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इक
याद
रह
गई
है
मगर
वो
भी
कम
नहीं
इक
दर्द
रह
गया
है
सो
रखना
सँभाल
कर
Mohammad Alvi
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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