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Mohammad Alvi
aur bazaar se kya le jaaun
aur bazaar se kya le jaaun | और बाज़ार से क्या ले जाऊँ
- Mohammad Alvi
और
बाज़ार
से
क्या
ले
जाऊँ
पहली
बारिश
का
मज़ा
ले
जाऊँ
कुछ
तो
सौग़ात
दूँ
घर
वालों
को
रात
आँखों
में
सजा
ले
जाऊँ
घर
में
सामाँ
तो
हो
दिलचस्पी
का
हादिसा
कोई
उठा
ले
जाऊँ
इक
दिया
देर
से
जलता
होगा
साथ
थोड़ी
सी
हवा
ले
जाऊँ
क्यूँँ
भटकता
हूँ
ग़लत
राहों
में
ख़्वाब
में
उस
का
पता
ले
जाऊँ
रोज़
कहता
है
हवा
का
झोंका
आ
तुझे
दूर
उड़ा
ले
जाऊँ
आज
फिर
मुझ
से
कहा
दरिया
ने
क्या
इरादा
है
बहा
ले
जाऊँ
घर
से
जाता
हूँ
तो
काम
आएँगे
एक
दो
अश्क
बचा
ले
जाऊँ
जेब
में
कुछ
तो
रहेगा
'अल्वी'
लाओ
तुम
सब
की
दु'आ
ले
जाऊँ
- Mohammad Alvi
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सोचने
बैठें
तो
इस
दुनिया
में
एक
लम्हा
न
गुज़ारा
जाए
Mohammad Alvi
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हर
इक
झोंका
नुकीला
हो
गया
है
फ़ज़ा
का
रंग
नीला
हो
गया
है
अभी
दो
चार
ही
बूँदें
गिरीं
हैं
मगर
मौसम
नशीला
हो
गया
है
करें
क्या
दिल
उसी
को
मांगता
है
ये
साला
भी
हटीला
हो
गया
है
ख़बर
क्या
थी
कि
नेकी
बांझ
होगी
बदी
का
तो
क़बीला
हो
गया
है
ख़ुदा
रक्खे
जवानी
आ
गई
है
गुनह
बांका-सजीला
हो
गया
है
न
जाने
छत
पे
क्या
देखा
था
'अल्वी'
बेचारा
चाँद
पीला
हो
है
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Mohammad Alvi
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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गुल-दान
में
गुलाब
की
कलियाँ
महक
उठीं
कुर्सी
ने
उस
को
देख
के
आग़ोश
वा
किया
Mohammad Alvi
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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