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Mohammad Alvi
har ik jhonka nukeela ho gaya hai
har ik jhonka nukeela ho gaya hai | हर इक झोंका नुकीला हो गया है
- Mohammad Alvi
हर
इक
झोंका
नुकीला
हो
गया
है
फ़ज़ा
का
रंग
नीला
हो
गया
है
अभी
दो
चार
ही
बूँदें
गिरीं
हैं
मगर
मौसम
नशीला
हो
गया
है
करें
क्या
दिल
उसी
को
मांगता
है
ये
साला
भी
हटीला
हो
गया
है
ख़बर
क्या
थी
कि
नेकी
बांझ
होगी
बदी
का
तो
क़बीला
हो
गया
है
ख़ुदा
रक्खे
जवानी
आ
गई
है
गुनह
बांका-सजीला
हो
गया
है
न
जाने
छत
पे
क्या
देखा
था
'अल्वी'
बेचारा
चाँद
पीला
हो
है
- Mohammad Alvi
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दो
तुंद
हवाओं
पर
बुनियाद
है
तूफ़ाँ
की
या
तुम
न
हसीं
होते
या
में
न
जवाँ
होता
Arzoo Lakhnavi
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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कहते
हैं
उम्र-ए-रफ़्ता
कभी
लौटती
नहीं
जा
मय-कदे
से
मेरी
जवानी
उठा
के
ला
Abdul Hamid Adam
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बचपना
ऐ
लड़को
तुम
सेे
कभी
छूटता
ही
नहीं
जवान
होना
तो
बस
लड़कियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
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सैर
कर
दुनिया
की
ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी
फिर
कहाँ
ज़िंदगी
गर
कुछ
रही
तो
ये
जवानी
फिर
कहाँ
Khwaja Meer Dard
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कभी
ज़रा
पास
आके
बैठो
नई
जवानी
चहक
रही
है
नई
उमंग
इक
नई
तरंग
इक
नये
चमन
में
महक
रही
है
Amaan Pathan
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वो
बुज़ुर्गों
की
बताई
तो
कहीं
मिलती
नहीं
अब
दुखों
को
झेलती
ही
बस
जवानी
रह
गई
Parul Singh "Noor"
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जवाँ
होने
लगे
जब
वो
तो
हम
से
कर
लिया
पर्दा
हया
यक-लख़्त
आई
और
शबाब
आहिस्ता
आहिस्ता
Ameer Minai
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याद
आओ
मुझे
लिल्लाह
न
तुम
याद
करो
मेरी
और
अपनी
जवानी
को
न
बर्बाद
करो
Akhtar Shirani
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
Mehshar Afridi
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और
बाज़ार
से
क्या
ले
जाऊँ
पहली
बारिश
का
मज़ा
ले
जाऊँ
कुछ
तो
सौग़ात
दूँ
घर
वालों
को
रात
आँखों
में
सजा
ले
जाऊँ
घर
में
सामाँ
तो
हो
दिलचस्पी
का
हादिसा
कोई
उठा
ले
जाऊँ
इक
दिया
देर
से
जलता
होगा
साथ
थोड़ी
सी
हवा
ले
जाऊँ
क्यूँँ
भटकता
हूँ
ग़लत
राहों
में
ख़्वाब
में
उस
का
पता
ले
जाऊँ
रोज़
कहता
है
हवा
का
झोंका
आ
तुझे
दूर
उड़ा
ले
जाऊँ
आज
फिर
मुझ
से
कहा
दरिया
ने
क्या
इरादा
है
बहा
ले
जाऊँ
घर
से
जाता
हूँ
तो
काम
आएँगे
एक
दो
अश्क
बचा
ले
जाऊँ
जेब
में
कुछ
तो
रहेगा
'अल्वी'
लाओ
तुम
सब
की
दु'आ
ले
जाऊँ
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Mohammad Alvi
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सदियों
से
किनारे
पे
खड़ा
सूख
रहा
है
इस
शहर
को
दरिया
में
गिरा
देना
चाहिए
Mohammad Alvi
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हर
इक
झोंका
नुकीला
हो
गया
है
फ़ज़ा
का
रंग
नीला
हो
गया
है
अभी
दो
चार
ही
बूँदें
गिरी
हैं
मगर
मौसम
नशीला
हो
गया
है
करें
क्या
दिल
उसी
को
माँगता
है
ये
साला
भी
हटीला
हो
गया
है
ख़बर
क्या
थी
कि
नेकी
बाँझ
होगी
बदी
का
तो
क़बीला
हो
गया
है
ख़ुदा
रक्खे
जवानी
आ
गई
है
गुनह
बाँका-सजीला
हो
गया
है
न
जाने
छत
पे
क्या
देखा
था
'अल्वी'
बेचारा
चाँद
पीला
हो
गया
है
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Mohammad Alvi
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सोचने
बैठें
तो
इस
दुनिया
में
एक
लम्हा
न
गुज़ारा
जाए
Mohammad Alvi
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नया
साल
दीवार
पर
टाँग
दे
पुराने
बरस
का
कैलेंडर
गिरा
Mohammad Alvi
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