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Mohammad Alvi
naya saal deewaar par taang de
naya saal deewaar par taang de | नया साल दीवार पर टाँग दे
- Mohammad Alvi
नया
साल
दीवार
पर
टाँग
दे
पुराने
बरस
का
कैलेंडर
गिरा
- Mohammad Alvi
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उस
से
मिले
ज़माना
हुआ
लेकिन
आज
भी
दिल
से
दु'आ
निकलती
है
ख़ुश
हो
जहाँ
भी
हो
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गुल-दान
में
गुलाब
की
कलियाँ
महक
उठीं
कुर्सी
ने
उस
को
देख
के
आग़ोश
वा
किया
Mohammad Alvi
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और
बाज़ार
से
क्या
ले
जाऊँ
पहली
बारिश
का
मज़ा
ले
जाऊँ
कुछ
तो
सौग़ात
दूँ
घर
वालों
को
रात
आँखों
में
सजा
ले
जाऊँ
घर
में
सामाँ
तो
हो
दिलचस्पी
का
हादिसा
कोई
उठा
ले
जाऊँ
इक
दिया
देर
से
जलता
होगा
साथ
थोड़ी
सी
हवा
ले
जाऊँ
क्यूँँ
भटकता
हूँ
ग़लत
राहों
में
ख़्वाब
में
उस
का
पता
ले
जाऊँ
रोज़
कहता
है
हवा
का
झोंका
आ
तुझे
दूर
उड़ा
ले
जाऊँ
आज
फिर
मुझ
से
कहा
दरिया
ने
क्या
इरादा
है
बहा
ले
जाऊँ
घर
से
जाता
हूँ
तो
काम
आएँगे
एक
दो
अश्क
बचा
ले
जाऊँ
जेब
में
कुछ
तो
रहेगा
'अल्वी'
लाओ
तुम
सब
की
दु'आ
ले
जाऊँ
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Mohammad Alvi
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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इक
याद
रह
गई
है
मगर
वो
भी
कम
नहीं
इक
दर्द
रह
गया
है
सो
रखना
सँभाल
कर
Mohammad Alvi
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