kuchh taalluq bhi nahin rasm-e-jahaan se aageus se rishta bhi raha vaham o gumaan se aage | कुछ त'अल्लुक़ भी नहीं रस्म-ए-जहाँ से आगे

  - Kabir Ajmal
कुछत'अल्लुक़भीनहींरस्म-ए-जहाँसेआगे
उससेरिश्ताभीरहावहमगुमाँसेआगे
लेकेपहुँचीहैकहाँसीम-बदनकीख़्वाहिश
कुछइलाक़ारहासूद-ओ-ज़ियाँसेआगे
ख़्वाब-ज़ारोंमेंवोचेहराहैनुमूकीसूरत
औरइकफ़स्लउगीरिश्ता-ए-जाँसेआगे
कबतलकअपनीहीसाँसोंकाचुकातारहूँक़र्ज़
मिरीआँखकोईख़्वाबधुआँसेआगे
शाख़-ए-एहसासपेखिलतेरहेज़ख़्मोंकेगुलाब
किसनेमहसूसकियाशोरिश-ए-जाँसेआगे
जबभीबोलउट्ठेंगेतन्हाईमेंलिक्खेहुएहर्फ़
फैलतेजाएँगेनाक़ूसअज़ाँसेआगे
जिसकीकिरनोंसेउजालाहैलहूमें'अजमल'
जलरहाहैवोदियाकाहकशाँसेआगे
  - Kabir Ajmal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy