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Siddharth Saaz
mujhe to uskaa bheetri ghubaar hai nikaalna
mujhe to uskaa bheetri ghubaar hai nikaalna | मुझे तो उसका भीतरी ग़ुबार है निकालना
- Siddharth Saaz
मुझे
तो
उसका
भीतरी
ग़ुबार
है
निकालना
सो
आँख
चूमता
हूँ
उसके
होंठ
चूमता
नहीं
- Siddharth Saaz
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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गुलाबी
होंट
भी
नज़दीक
थे
पर,
हमारे
होंट
ने
माथा
छुआ
था
हमारी
प्यास
भी
सब
सेे
अलग
थी,
हमारा
ज़ब्त
भी
सब
सेे
जुदा
था
Satya Prakash Soni
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एक
दम
उस
के
होंट
चूम
लिए
ये
मुझे
बैठे
बैठे
क्या
सूझी
Nasir Kazmi
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न
उन
लबों
पे
तबस्सुम
न
फूल
शाख़ों
पर
गुज़र
गए
हैं
जो
मौसम
गुज़रने
वाले
थे
Kaif Uddin Khan
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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शौक़
है
इस
दिल-ए-दरिंदा
को
आप
के
होंठ
काट
खाने
का
Jaun Elia
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सिर्फ़
उस
के
होंट
काग़ज़
पर
बना
देता
हूँ
मैं
ख़ुद
बना
लेती
है
होंटों
पर
हँसी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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चेहरा
देखें
तेरे
होंट
और
पलकें
देखें
दिल
पे
आँखें
रक्खें
तेरी
साँसें
देखें
Tehzeeb Hafi
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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ऐसे
इक़रार
में
इंकार
के
सौ
पहलू
हैं
वो
तो
कहिए
कि
लबों
पे
न
तबस्सुम
आए
Asad Bhopali
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वो
जब
जब
ज़्यादा
ग़ुस्से
में
होती
है
बादल
घिर
आते
हैं
पूरी
बस्ती
पर
Siddharth Saaz
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तेरा
मोहब्बत
से
हार
जाना
मेरी
मोहब्बत
की
हार
भी
है
Siddharth Saaz
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चाँद,
सूरज
और
बादल
देखकर
हँस
रहा
था
एक
पागल
देखकर
मैं
समझता
हूँ
जुनून-ए-इश्क़
भी
दौड़
पड़ता
हूँ
मैं
जंगल
देखकर
वो
शिकारी
पहले
इंसाँ
था
तभी
रो
दिया
था
मुझको
घाइल
देखकर
वो
उठाएगा
नज़र
तो
कोई
भी
डूब
जाएगा
वो
दलदल
देखकर
लम्स
तक
उसके
बदन
का
याद
है
उसकी
याद
आती
है
मख़मल
देखकर
हीरे
तक
के
भाव
कम
होने
लगे
उसकी
वो
चाँदी
की
पायल
देखकर
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Siddharth Saaz
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वो
मुझ
सेे
लेकर
जाती
दो
बोसे
अपने
माथे
पर
और
मेरे
होंठों
पे
अपना
ज़ायका
छोड़
के
जाती
थी
Siddharth Saaz
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फिर
कहाँ
वो
किसी
की
सुनेगा
कभी
इक
दफ़ा
तेरे
होंठों
पुकारा
हुआ
Siddharth Saaz
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